गूगल कहता है की रैंकिंग के 200 से ज्यादा सिग्नल हैं। किन्तु किसी को भी पूरे 200 रैंकिंग सिग्नल का ज्ञान नहीं और ना ही गूगल अपने सीक्रेट किसी को बताता है। अब ये तो आपकी seo प्रैक्टिस पर निर्भर करता है की आप कितनी समझदारी से सर्च इंजन फंडामेंटल को समझते हुए काम करते हैं और अपने यूआरएल को रैंक कराते हैं
 रैंकिंग फैक्टर्स:

1 - डोमेन की उम्र

2 - डोमेन का लगातार एक्टिव रहना

3 - डोमेन का सर्च रिकॉर्ड

4 - डोमेन की विश्वसनीयता

5 - डोमेन पर आगंतुकों की संख्या

6 - डोमेन पर व्यतीत किया जाने वाला समय

7 - डोमेन के लेख

8 - डोमेन का डिज़ाइन और स्ट्रक्चर

9 - डोमेन की इंटरलिंकिंग

10 - डोमेन की बैकलिंकिंग

11 - डोमेन का सोशल मीडिया लेवल

12 - डोमेन का अपटाइम एवं डाउनटाइम

13 - डोमेन का एस.ई.ओ स्कोर

14 - डोमेन का ऑन पेज फैक्टर

15 - डोमेन पर कभी गूगल की वार्निंग न होना

16 - डोमेन पर गूगल द्वारा कभी पेनल्टी न होना

17 - डोमेन का बाउंस रेट प्रतिशत

ऊपर लिखे सभी 17 बिंदु रैंकिंग फैक्टर हैं जिसे सिग्नल्स भी कह सकते हैं जो 200 से बेहद कम हैं। किन्तु अगर आप केवल इन 17 बिंदुओं को भी समझकर अच्छे से काम कर रहे हैं तो रैंकिंग आनी तय है। याद रहे डोमेन अथॉरिटी के पीछे आप न भागें, डोमेन की ऑथरिटी आपके लेखन पर निर्भर है आप अगर क्वालिटी कंटेंट सालों से गूगल को दे रहे हैं तो आपका डोमेन अथॉरिटी लेवल बढ़ेगा केवल पुराने होने से काम नहीं चलता।