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पब्जी इतना प्रसिद्ध कैसे हो गया?

पब्जी खेल अंत तक जीवित रहने की इंसानी जिजीविषा के मूल पर आधारित एक वीडियो गेम है।

इस खेल में किसी व्यक्ति या समूह को अकेले अथवा साथियों के साथ मिलकर बाहर करना होता है।

पब्जी में इंसान के मनोविज्ञान व संवेदनाओं का पूरा फायदा उठाया गया है। जिसमें

दोस्तों के साथ जुगलबंदी,

अपने समूह द्वारा बल प्रयोग से दूसरे समूहों का दमन।

प्रतिस्पर्धा

चीजें इकठ्ठा करना,

घायल साथी की मदद,

साहसिक कार्य,

गाड़ी चलाने की इच्छा,

बंदूक चलाने की इच्छा

पॉइंट्स इकठ्ठा कर दूसरों से श्रेष्ठ बनना व भांति के तमगे हासिल करना इत्यादि हैं।

पहले ये खेल केवल कंप्यूटर में उपलब्ध था और इसके लिए एक दमदार सीपीयू की आवश्यकता रहती थी। किन्तु 2018 में ये मोबाइल में आ गया।

फिर क्या था आग की लपटों की तरह इसका खुमार लोगों के सर चढ़ गया। इसके सामने कैंडी क्रश, क्लेश ऑफ क्लैंस इत्यादि प्रचलित खेल धराशाही हो गए।

मोबाइल को आप कहीं भी ले जाकर खेल सकते हैं। इसी वजह से लोग कॉलेज स्कूल ऑफिस या सफर करते समय आसानी से इसका लुत्फ उठा सकते हैं।

आज के समय में लोग हाथ पैरों से होने वाले कामों से दूर भागते हैं। हाथ पैर चलाने में शारीरिक कष्ट होता है।

फुटबॉल या कोई अन्य अत्यधिक भागा दौड़ी वाले शारीरिक खेल हम एक या दो घंटे से ज्यादा नहीं खेल सकते किन्तु लोग लगातार 4 घंटे पब्जी खेल लेते हैं और समय का पता भी नहीं चलता है।

थोड़े आराम, खाने इत्यादि के बाद कुछ लोग दिन के 18 घंटे भी खेलते हैं। इसमें ज्यादा शारीरिक थकान नहीं होती और मजा भी आता है किन्तु अंदरखाने मानसिक उबासी जरूर होती है।

इसमें खेल का भूभाग, बंदूके, घर, गाड़ी, खिलाड़ी इत्यादि दृष्टिगत रूप से आंखों को काफी मनमोहक लगते हैं।

आप अपने खिलाड़ी को पुरुष या महिला कुछ भी बना सकते हो और भांति तरीकों से सजा सकते हो।

एक बार में 100 खिलाड़ी होने के कारण ये किसी प्रतियोगी परीक्षा से कम नहीं है।

हालंकि इसमें खिलाड़ी लगभग आपके जितनी क्षमता वाले होंगे और जैसे आप और कुशल होते जाएंगे आपका सामना और अच्छे खिलाडियों से होगा।

मतलब एक वाक्य में अगर बोला जाय तो घर बैठे ही आपको वो सब एडवेंचर कार्य करने को मिल जा रहे हैं जो हम हकीकत में नहीं कर सकते हैं।

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