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क्रेडिट कार्ड सुरक्षित रखने के मंत्र फिशिंग मेल्स : स्किम्मिंग स्टोलेन क्रेडिट कार्ड : साइट क्लोनिंग या स्पूफ़िंग :

जब हम क्रेडिट कार्ड फ्रॉड के बारे में सोचते हैं तो सबसे पहले हमारे दिमाग में एक ही बात आती है कि क्रेडिट कार्ड चोरी हो जायेगा और कोई उससे जमकर खरीददारी कर लेगा। अब नए टेक्नोलॉजी युग में चोरी का फार्मूला पुराना हो चुका है। आज कल नई तकनीकों के माध्यम से चोर आपके क्रेडिट कार्ड की मैग्नेटिक स्ट्रिप में स्टोर्ड डाटा को कॉपी कर लेता है और फिर खरीददारी कर क्रेडिट कार्ड फ्रॉड को अंजाम देता है।

इसके अलावा ये चोर कुछ अलग ट्रिक्स का भी इस्तेमाल करते हैं। ये लोग फेक और फिशिंग इमेल्स के द्वारा भी आपके क्रेडिट कार्ड की सभी जरूरी इनफार्मेशन हासिल कर लेते हैं और फिर उसका इस्तेमाल ऑनलाइन खरीददारी में करते हैं।

टाइप्स ऑफ़ क्रेडिट कार्ड फ्रॉड | क्रेडिट कार्ड फ्रॉड के प्रकार

〉〉〉 फिशिंग मेल्स :

फिशिंग मेल्स के द्वारा क्रेडिट कार्ड की इनफार्मेशन चुराने का तरीका सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाता है। इसमें क्रेडिट कार्ड होलडेर को लाटरी लगने जैसे लुभावने मेल किए जाते हैं। अगर कोई इन मेल्स को रिप्लाई करता है तो उनसे आइडेंटिटी या ऑथॉरिजातिओं प्रूफ देने के नाम पर क्रेडिट कार्ड डिटेल्स ले ली जाती हैं। यही काम कई बार फ़ोन करके भी किया जाता है।

〉〉〉 स्किम्मिंग :

क्रेडिट कार्ड स्किम्मिंग में एक छोटी सी डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है जिसकी मदद से क्रेडिट कार्ड की मैग्नेटिक स्ट्रिप के डाटा को कॉपी कर लिया जाता है। एटीएम और रिटेलर आउटलेट्स पर अपने क्रेडिट कार्ड को स्वाइप करते समय आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कहीं कोई क्लोन डिवाइस तो नहीं लगी।

〉〉〉 स्टोलेन क्रेडिट कार्ड :

क्रेडिट कार्ड चोरी करके भी इससे ऑनलाइन या ऑफलाइन शॉपिंग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। चोरी करने वाले को यदि आपके कार्ड का पिन नंबर पता चल जाता है तो वो इस कार्ड को कुछ भी इस्तमाल कर सकता है। आप जब तक अपने बैंकर को कार्ड चोरी होने की सूचना देते हैं तब तक चोर अपना काम कर चुका होता है।

〉〉〉 साइट क्लोनिंग या स्पूफ़िंग :

ये तरीका अभी हमारे हिन्दुस्तान में बहुत अधिक नोन नहीं हैं। पर हमारा अंदाज़ा है आगे आने वाले समय में साइट क्लोनिंग या स्पूफ़िंग से क्रेडिट कार्ड की डिटेल्स चुराने का तरीका बहुत जल्दी प्रचलन में होगा और कई लोगों को अपना शिकार बनाएगा। इसमें आपको अपने बैंक या किसी ऑनलाइन शॉपिंग साइट से किसी बहुत ही अच्छे ऑफर का मेल आएगा। जिसमे किसी लिंक पर क्लिक करने को कहा जाएगा।

आप जब दिए गए लिंक पर क्लिक करेंगे तो आपके बैंक या ऑनलाइन शॉपिंग साइट की वेबसाइट ओपन हो जाएगी। लेकिन सबसे बड़ा पेच यही है कि ये वेबसाइट हुबहू ओरिजिनल वेबसाइट जैसी तो होगी पर ये ओरिजिनल नहीं होगी। आप इसे ओरिजिनल समझ कर अपने क्रेडिट कार्ड की सभी डिटेल्स जैसे कि क्रेडिट कार्ड नंबर , नाम , CVV, वैलिड फ्रॉम और पिन या पासवर्ड भर देंगे। थोड़ी देर में आपके पास पेमेंट की रिसीप्ट भी आ जाएगी जैसे कि ओरिजिनल वेबसाइट से आती है। जिससे की आपको इस स्टेज पर किसी तरह का कोई शक न हो।

अब आप अपने क्रेडिट कार्ड की सारी डिटेल्स नकली वेबसाइट चलाने वाले को दे चुके हैं। अब वो जैसा चाहे, इन डिटेल्स का वैसे इस्तेमाल कर सकता है। आपको लगा आज आपने एक अच्छा ऑफर लेबिल किया लेकिन हकीकत में आप क्रेडिट कार्ड फ्रॉड का शिकार हो गए।

〉〉〉 आइडेंटिटी थेफ़्ट

आइडेंटिटी थेफ़्ट का सीधा सा मतलब ये है कि आपकी आइडेंटिटी को चुराकर आपके नाम से फ्रॉड किया जाए। इस तरह के काफी फ्रॉड्स अभी नोटबंदी के दौरान सुनने में आये थे। इसके पहले कुछ को-ऑपरेटिव सोसाइटीज द्वारा भी इस तरह के फ्रॉड्स को अंजाम देने की ख़बरें हमने अख़बारों में जरूर पढ़ी होंगी। जिनके केस अभी कोर्ट में चल रहे हैं। आइडेंटिटी थेफ़्ट को दो काटेगोरिएस में बांटा जा सकता है:

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