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लीवर को दुरुस्त करने के उपाय क्या है ?लीवर को मजबूत बनाने के उपायलीवर क्या है?लीवर का कार्य क्या है?लीवर के रोग ग्रस्त होने के क्या कारण है?

लीवर को हिन्दी में जिगर या यकृत के नाम से जाना जाता है। यह मानवीय शरीर के अंदरूनी अंगों में सबसे विशाल और महत्वपूर्ण अंग है। इसका भार 1500 ग्राम से 2000 ग्राम तक हो सकता है। यह लाल और भूरे रंग का होता है। हाथ लगाने पर यह रबड़ की तरह महसूस होता है। लीवर पेट के दाहिने हिस्से की पसलियों के पीछे होता है।

लीवर का कार्य क्या है?

लीवर का संबंध सीधे तौर पर पाचन क्रिया से होता है इस जानकारी से तो सभी अवगत है। लेकिन लीवर का कार्य सिर्फ पाचन क्रिया तक ही सीमित नहीं है। यह शरीर की लगभग 500 क्रियाओं को अपने नियंत्रण में रखता है।

ऐसे में अगर लीवर की सेहत पर जरा भी असर पड़ता है तो हमारे शरीर की कार्यप्रणाली की क्षमता भी नष्ट होने लगती है। आइए लीवर के मुख्य कार्य को सरल भाषा में समझे।

पित्त का निर्माण और इसका स्राव करता है। पित्त वसा और विटामिन के अवशोषण के लिए अनिवार्य है।

जहरीले पदार्थ को लीवर निष्क्रिय कर प्रोटीन का निर्माण करता है जिससे शरीर संक्रमण से बचा रहे।

एल्कोहल, दवा, अन्य पदार्थों आदि को अवशोषित करके खून में मिलाता है। साथ में कोलेस्ट्रॉल, हार्मोन आदि का निस्तारण भी करता है।

कई प्रकार के एंजाइम को कार्यरत करने के साथ ही पाचन क्रिया के लिए जरूरी एंजाइम्स का निर्माण करता है।

ग्लाइकोजेन, विटामिन, खनिज, विटामिन बी12, ग्लूकोज और आयरन आदि का संग्रहण करता है।

शरीर से विषाक्त टोक्सिन को बाहर निकालने यानी मलत्याग का मुख्य कार्य करता है।

बहते रक्त को रोकने वाले तत्वों का निर्माण करता है

चयापचय को मजबूत बनाता है।

कई प्रकार के महत्वपूर्ण रसायन का निर्माण व स्राव करता है जो अन्य अंगों के लिए अति आवश्यक होते है।

लीवर द्वारा निर्मित पित्त एक तरह का क्षारीय पदार्थ अल्कलाइन होता है जो पेट के एसिड को कम करके एसिड से होने वाले नुकसान से शरीर की रक्षा करता है।

पित्त के बिना वसा का पाचन संभव नही और ना ही शरीर भोजन से विटामिन ग्रहण कर पाता है जो वसा में घुलनशील होते है जैसे – विटामिन A, विटामिन D, विटामिन E, विटामिन K आदि।

पित्ताशय को अपना काम सही ढंग से करने के लिए लीवर द्वारा निर्मित पित्त की आवश्यकता पड़ती है। पित्ताशय में जैसे ही कुछ मात्रा पित्त की जाती है पित्त गाढ़ा होने लगता है उसके बाद पित्ताशय आवश्यकता अनुसार इसका स्राव करता है। यह प्रणाली पाचन की क्रिया को सही तरीके से चलाने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।

भोजन के पचने के समय शरीर में अमोनिया बनने लगती है जो शरीर के लिए विषाक्त हो सकती है लेकिन लीवर इसे यूरिया में बदल कर गुर्दे के माध्यम से पेशाब के जरिए शरीर से बाहर निकाल देता है।

शरीर जब भी बीमार होता है या शरीर को जरूरत के वक्त भोजन नही मिलता तब शरीर को ऊर्जा यानी ग्लूकोज की जरूरत पड़ती है तब इस कमी की पूर्ति लीवर करता है यह ग्लूकोज ग्लाइकोजेन के रूप में लीवर में संगृहीत रहता है।

लीवर के रोग ग्रस्त होने के क्या कारण है?

अधिक देर तक बैठने की आदत से लीवर में फैट जमा होने लगता है जिससे लीवर का आकार असामान्य हो जाता है। जिसे फैटी लीवर कहते है इसका मुख्य कारण मोटापा, अधिक धूम्रपान, मधुमेह, शराब का अधिक सेवन, खून में अधिक फैट, अनुवांशिकता, तैलीय पदार्थ का अधिक सेवन, पेरासिटामोल का अधिक सेवन या किसी भी दवा के दुष्परिणाम।

लीवर को नुकसान पहुँचने पर यह अपनी मरम्मत करने में स्वंय सक्षम है। आपको शायद ही यह पता हो मानव शरीर में लीवर एकमात्र ऐसा अंग है जो अपने आप ही स्वंय बन जाता है। अगर लीवर का चौथाई हिस्सा भी बचा हो और सुचारू रूप से अपना कार्य कर रहा हो तो यह अपने आप ही स्वंय को पूर्ण रूप से बना लेता है। लेकिन अगर बार-बार लीवर को क्षति पहुँचती है तो इसमें घाव हो जाता है जो ठीक नही हो पाता और इस अवस्था को सिरोसिस कहते है यह अवस्था लीवर फेल होने का मुख्य कारण बनती है। सिरोसिस जैसी समस्या अधिक शराब के सेवन से होती है।

हेपेटाइटस लीवर में होने वाला ऐसा संक्रमण है जिससे लिवर में सूजन या जलन पैदा हो जाती है। इनमे हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई आदि होते है। ये संक्रमण वायरस, गन्दगी, दूषित रक्त चढ़ाने के कारण हो सकते है और भी कई संक्रमण होते है जिसके कारण भी लिवर को क्षति पहुँच सकती है। हेपेटाइटिस बी और सी लीवर कैंसर का मुख्य कारण है। आपको जानकार यह आश्चर्य होगा आज के समय में होने वाले कैंसर में से लीवर कैंसर पांचवे स्थान पर है। सतर्कता और नियमित स्वास्थ्य जाँच से लीवर कैंसर के शुरुआती लक्षणों का पता लगाया जा सकता है। हेपेटाइटिस बी और सी की जाँच और सही तरीके के उपचार व देखभाल से इस गंभीर बीमारी को मात दी जा सकती है।

किसी भी तरह के कैंसर के उपचार में प्रयो�

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