इंटरनेट का दुरुपयोग और साइबर क्राइम

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इंटरनेट का दुरुपयोग और साइबर क्राइम

हाल ही में वर्ल्ड वाइड वेब यानी डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू के खोजकर्ता व ब्रिटिश वैज्ञानिक सर टिम बर्नर्स ने इंटरनेट के दुरुपयोग को लेकर चिंता जाहिर करते हुए दुनियाभर की सरकारों को चिट्ठी लिखकर इसे राेकने के लिए एकजुट हाेने की बात कही है। सर टिम बर्नर्स का कहना कि यदि हम अभी सचेत नहीं हुए ताे दुनिया के लिए बड़ी हार हाेगी। निःसंदेह, यह आधुनिक समय में इंटरनेट के माध्यम से हो रही दुर्गति का साफ संकेत है। सच है कि इंटरनेट ने विश्व ग्राम की अवधारणा को मूर्त रूप देकर सूचनाओं का व्यापक तंत्र विकसित कर दुनिया को एक स्क्रीन पर लाने का काम किया है, लेकिन यह भी सच है कि इंटरनेट के दुरुपयाेग ने हमारी स्वस्थ चिंतन प्रणाली, वैचारिक क्षमता, तर्क शक्ति का ह्रास कर हमें कई विकारों से ग्रसित कर डाला है। हम इंटरनेट की भूलभुलैया में आभासी मित्रों से संबंध बनाने की अंधी प्रतिस्पर्धा में वास्तविक जगत के रिश्ते-नातों के प्रति विमुख होते जा रहे हैं। लाइक और कमेंट्स को हासिल करने की निरर्थक होड़ में अपने को भावनात्मक रूप से रुग्ण बनाने पर तुले हुए हैं। यह एक आम धारणा है कि इंसान बुराइयों की ओर स्वतः आकर्षित होता है। इस कारण आज इंटरनेट पर युवावर्ग गलत दिशा की ओर गमन कर रहा है, जो बेहद चिंताजनक है।

गौरतलब है कि दुनिया मेें 3.9 अरब लोग इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। भारत में 56 करोड़ यूजर्स हैं। 2018 में दुनियाभर में इंटरनेट यूजर्स की संख्या 51.2% है। 1995 में महज 1.6 करोड़ लोग ऑनलाइन थे। इंटरनेट भारतीय अर्थव्यवस्था में सालाना 7.10 लाख करोड़ रु. का योगदान देता है। हर साल औसतन 14 हजार करोड़ मोबाइल बिक रहे हैं। भारत में साइबर अडिक्शन को लेकर किए गए एक सर्वे के अनुसार 18 से 30 साल के बीच 5 में से 3 युवा ऐसे हैं, जो अपने स्मार्टफोन के बगैर इस तरह बेचैन होने लगते हैं जैसे उनका कोई अंग गायब हो। इनमें 96 फीसदी सवेरे उठकर सबसे पहले सोशल मीडिया पर जाते हैं। 70 फीसदी युवाओं का कहना है कि वे ई-मेल और सोशल मीडिया को चेक किए बगैर जी नहीं सकते। दस देशों के 10,000 लोगों पर वैश्विक प्रबंधन परामर्श कंपनी ए.टी. कियर्नी द्वारा किए गए शोध में यह बात सामने आई कि 53 फीसदी भारतीय हर घंटे इंटरनेट से जुड़े रहते हैं जो कि वैश्विक औसत 51 फीसदी से ज्यादा है। इनमें 77 फीसदी लोग सोशल नेटवर्किंग साइटों पर रोजाना लॉग इन करते हैं। भारत में बेहद सस्ती दरों में उपलब्ध डेटा की वजह से कम आय वर्ग वाले लोगों के पास भी स्मार्टफोन उपलब्ध हैं जिसका सदुपयोग के बजाय दुरुपयोग भी होने लगा है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में किए गए एक अध्ययन के अनुसार इंटरनेट ओवर यूज करने वाले लोग यह भूल जाते हैं कि वह वास्तविक जगत में रहते हैं, वर्चुअल वर्ल्ड में नहीं, जहां वास्तविक लोग और उनसे जुड़ी वास्तविक जिम्मेदारियों का उन्हें वहन करना होता है। 

आज इंटरनेट एक जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है, इसलिए युवा इसके आदी हैं। इंटरनेट का अत्यधिक उपयोग उन्हें अपनी पढ़ाई में कम दिलचस्पी देता है। माता-पिता को यह नहीं पता कि उनके बच्चे इंटरनेट पर क्या करते हैं, इसलिए युवा निडर होते हैं और वे इसके बुरे प्रभावों को जाने बिना किसी भी साइट पर जाने के लिए स्वतंत्र हैं। आमतौर पर वे हैकिंग और अन्य बुरी गतिविधियों में शामिल हो जाते हैं, जिन्हें 'साइबर क्राइम' कहा जाता है। इंटरनेट का अत्यधिक उपयोग युवाओं की शैक्षणिक और सामाजिक गतिविधियों को नुकसान पहुंचाता है। हर कोई अधिक तनावपूर्ण, उदास और भ्रमित हो रहा है। युवा सामाजिक मूल्यों और मानदंडों को भूल रहा है। वे मूडी और नर्वस हो गए हैं। इंटरनेट का अत्यधिक उपयोग हर किसी के जीवन को बाधित कर रहा है। इस संबंध में माता-पिता की भूमिका प्रभावी होनी चाहिए।
उन्हें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि उनके बच्चे इंटरनेट पर क्या कर रहे हैं। उन्हें यह तय करना होगा कि बच्चों को इंटरनेट तक पहुंचने की क्या आवश्यकता है और क्या नहीं अगर वे चाहते हैं कि उनके बच्चे अच्छे नागरिक और मानव के रूप में सफल हों। इंटरनेट आपकी कमजोरी न बने और इसका इस्तेमाल अन्य रचनात्मक कार्यों की जगह न बना ले, इस पर ध्यान देना जरूरी है। आपका काम ही आपकी पहचान बनता है और रचनात्मक कार्य पूरी तरह से किसी भी व्यक्ति की निजी मेहनत का नतीजा होता है। लिहाजा, इंटरनेट इस्तेमाल करने के संबंध में कुछ स्वनिर्धारित नियम काम में लाए जा सकते हैं। स्पष्ट है कि सरकार और समाज दोनों को इस मोर्चे पर मिलकर काम करना पड़ेगा। प्रभावी कानूनी संरचना का निर्माण कर इंटरनेट का दुरुपयोग करने वालों के प्रति शिकंजा कसना होगा।

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