IOS या Android: कौन है ज्यादा बेहतर और सुरक्षित? 5 प्वाइंट्स में समझें एक्सपर्ट से

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IOS या Android: कौन है ज्यादा बेहतर और सुरक्षित? 5 प्वाइंट्स में समझें एक्सपर्ट से

दोस्तों इस समय स्मार्टफोन बाजार में दो ही ऑपरेटिंग सिस्टम के फोन चल रहे हैं। पहला है एप्पल का आईओएस और दूसरा गूगल का एंड्रॉयड। यह सवाल काफ़ी पुराना है कि आईफोन और एंड्रॉयड में से कौन सा फोन बेहतर है। कई बार सिक्योरिटी को लेकर बात होती है तो कई बार परफॉर्मेंस को लेकर। आज हम बात करेंगे की आईफोन एंड्रॉयड से कितना अलग है और कितना सुरक्षित? तो आइए जानते हैं-
1-परफॉर्मेंस
सबसे पहले परफॉर्मेंस की बात करें तो सभी को पता है कि आईफोन बेहतर है, हालांकि अब बेहतर परफॉर्मेंस वाले एंड्रॉयड फोन भी बाजार में आने लगे हैं, लेकिन आईफोन के साथ यह अच्छी बात है कि ये शायद ही कभी हैंग होता है, जबकि एंड्रॉयड फोन में कुछ समय के बाद हैंग होने की समस्या आने लगती है। एंड्रॉयड के मुकाबले आईफोन काफी स्मूथ है और आईफोन का  प्रोसेेेसर भी कई मामलों में एंड्रॉयड से  काफी बेहतर है।

2- सॉफ्टवेयर
आईफोन के सॉफ्टवेयर की बात करें तो एप्पल करीब 5 साल पुराने आईफोन के लिए भी अपडेट जारी करता है, जबकि एंड्रॉयड में ऐसा नहीं है। एंड्रॉयड में अधिकतम 2 साल तक ही अपडेट मिलता है।

3-प्राइवेसी और सिक्योरिटी
स्मार्टफोन की प्राइवेसी और सिक्योरिटी की बात हो और आईफोन की चर्चा ना हो यह हो ही नहीं सकता। एप्पल अपने यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर कितना गंभीर रहतीं हैं इसका अंदाजा आप साल 2016 मे पाकिस्तानी मूल के आतंकवादी सैयद फारूख ने कैलिफोर्निया में गोलीबारी की थी, जिसमें 14 लोगों की मौत हो गई थी। घटना के बाद आतंकी का आईफोन अमेरिकी खुफिया एजेंसी के हाथ लगा जिसे अनलॉक करने के लिए एजेंसी ने एप्पल से मदद मांगी थी, लेकिन एप्पल ने आईफोन को अनलॉक करने से मना कर दिया था। एप्पल ने  कहा था कि वह यूजर्स के प्राइवेसी के साथ कोई समझौता नहीं करेगी।
 तो एप्पल की सिक्योरिटी एंड्रॉयड के मुकाबले बहुत अधिक है। कई एंड्रॉयड फोन की फेस आईडी को फोटो के जरिए भी खोलने की बात आई हैं, लेकिन आईफोन के साथ ऐसा नहीं है।

4-आईफोन और एंड्रॉयड की सिक्योरिटी में अंतर
आईफोन के आईओएस के मुकाबले एंड्रॉयड को काफी ओपन और फ्लैैैैैग्सिबल(लचीला) जिससे डेवलपर्स और यूजर्स को कई सारे फायदे मिलते हैं, लेकिन जब किसी मैलवेयर के फोन में पहुंचने की बात होती है तो एंड्रॉयड कमजोर पड़ जाता है, क्योंकि एप्पल जब कोई अपडेट जारी करता है तो वह तुरंत यूजर्स को मिलता है, जबकि एंड्रॉयड का अपडेट यूजर्स को तुरंत नहीं मिल पाता है क्योंकि तमाम एंड्रॉयड मोबाइल निर्माता कंपनियां अपने फोन में कस्टम यूजर्स इंटरफेस(यू आई) देती है। ऐसे में गूगल द्वारा अपडेट जारी करने के बाद भी यूजर्स को जल्दी अपडेट नहीं मिल पाता है।

5-वायरस आने का खतरा
आईफोन की सिक्योरिटी एक बंद कमरे की तरह है जिसके चारों ओर मजबूत दिवारेे हैं। ये दिवारे एप्स और ऑपरेटिंग सिस्टम के बीच में है। एप्पल सभी तरह के थर्ड पार्टी एप्स को बारीकी से जांच करता है और उसके बाद ही एप को एप्पल के एप स्टोर पर पब्लिश किया जाता हैं। ऐसे में किसी आईफोन में मैलवेयर के पहुंचने की संभावना जीरो रह जाती है।

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