भारतीय संविधान के मौलिक अधिकार ( Fundamental Rights)

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भारतीय संविधान के मौलिक अधिकार ( Fundamental Rights)

इसे संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से लिया गया है |
मौलिक अधिकारों में संशोधन हो सकता है एक राष्ट्रीय आपात के दौरान( अनुच्छेद 352 )जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को छोड़कर अन्य मौलिक अधिकारों को स्थगित किया जा सकता है |
मूल संविधान में सात मौलिक अधिकार थे लेकिन 44 वें संविधान संशोधन( 1978 ईस्वी )के द्वारा संपत्ति का अधिकार (अनुच्छेद 31 एवं 19 का )को मौलिक अधिकार की सूची से हटा कर इसे संविधान के अनुच्छेद 300(a) के अंतर्गत कानूनी अधिकार के रूप में रखा गया है |
Note: 1931 में कराची अधिवेशन (अध्यक्ष सरदार वल्लभभाई पटेल) में कांग्रेस ने घोषणा पत्र में मूल अधिकारों की मांग की |मूल अधिकार को प्रारूप जवाहरलाल नेहरू ने बनाया था |
  1. समता या समानता का अधिकार
  • अनुच्छेद 14 : विधि के समक्ष समानता :इसका अर्थ यह है कि राज्य सभी व्यक्तियों के लिए एक समान कानून बनाए गए तथा उन पर एक समान लागू करेगा |
  • अनुच्छेद 15: धर्म ,जाति, नस्ल, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध:राज्य के द्वारा धर्म, मूल वंश, जाति ,लिंग एवं जन्म स्थान आदि के आधार पर नागरिकों के प्रति जीवन के किसी भी क्षेत्र में भेदभाव नहीं किया जाएगा |
  • अनुच्छेद 16 :लोक नियोजन के विषय में अवसर की समता :राज्य के अधीन किसी पद पर नियोजन या नियुक्ति के संबंधित विषयों के सभी नागरिकों के लिए अवसर की समानता होगी |
  • अनुच्छेद 17 : अस्पृश्यता का अंत : अस्पृश्यता के उन्मूलन के लिए उसे दंडनीय अपराध घोषित किया गया है |
  • अनुच्छेद 18 : उपाधियों का अंत : सेना या विधा से बंधी सम्मान के सिवा अन्य कोई भी उपाधि राज्य द्वारा प्रदान नहीं की जाएगी | भारत का कोई नागरिक किसी अन्य देश से बिना राष्ट्रपति की आज्ञा के कोई उपाधि स्वीकार नहीं कर सकता है |
Note:भारत सरकार द्वारा भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण ,पद्म श्री एवं सेना द्वारा परम वीर चक्र महावीर चक्र, वीर चक्र पुरस्कार अनुच्छेद 18 के तहत दिए जाते हैं |
2.स्वतंत्रता का अधिकार
  • अनुच्छेद 19 : मूल संविधान में 7 तरह की स्वतंत्रता का उल्लेख था अब सिर्फ छह है -
a. बोलने की स्वतंत्रता |
b. शांतिपूर्वक बिना हथियारों के एकत्रित होने और सभा करने की स्वतंत्रता |
c. संघ बनाने की स्वतंत्रता |
d. देश के किसी भी क्षेत्र में आवागमन की स्वतंत्रता |
e. देश के किसी भी क्षेत्र में निवास करने और बसने की स्वतंत्रता |
f. संपत्ति के अधिकार | (44 वां संविधान संशोधन 1978 के द्वारा हटा दिया गया)
g. कोई भी व्यापार एवं जीविका चलाने की स्वतंत्रता |
  • अनुच्छेद 20 :अपराधों के लिए दोस्सीधी के संबंध में संरक्षण: इसके तीन प्रकार की स्वतंत्रता का वर्णन है-
a. किसी भी व्यक्ति को एक अपराध के लिए सिर्फ एक बार सजा मिलेगी |
b. अपराध करने के समय जो कानून है उसी के तहत सजा मिलेगी ना कि पहले और बाद में बनने वाले कानून के तहत |
c. किसी भी व्यक्ति को सुनाएं के विरुद्ध न्यायालय में गवाही देने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा
  • अनुच्छेद 21 :प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण: किसी भी व्यक्ति को विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अतिरिक्त उसके जीवन और व्यक्तित्व स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है |
  • अनुच्छेद 22 :कुछ दशकों में गिरफ्तारी और निरोध में संरक्षण: अगर किसी भी व्यक्ति को मनमाने ढंग से हिरासत में ले लिया गया हो तो उसे तीन प्रकार की स्वतंत्रता प्रदान की गई है -
a. हिरासत में लेने का कारण बताना होगा |
b. 24 घंटे के अंदर (आने जाने के समय को छोड़कर )उसे दंडाधिकारी के समक्ष पेश किया जाएगा |
c. उसे अपने पसंद के वकील से सलाह लेने का अधिकार होगा |

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