मल्टी लेवल मार्केटिंग का बढ़ता कारोबार आपकी जेब पर पड़ रहा है भारी

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मल्टी लेवल मार्केटिंग का बढ़ता कारोबार आपकी जेब पर पड़ रहा है भारी

देश में इन दिनों बेरोजगारों को रोजगार देने की एक विशेष योजना आई है जिसको मल्टी लेवल मार्केटिंग यानि "एमएलएम" बोला जाता है। बहुत शानदार तरीके से इसमें फ्री में मेंबर बनवाकर बहुत सी कंपनियां हर आयु वर्ग के लोगों के लिए दो के चार करवा रही हैं साथ ही खुद भी मुनाफे के रूप में बड़ी कमाई कर रही हैं। 
आपको ज्वाइन करवाकर बाकायदा एक एक्जीक्यूटिव बनाया जाएगा और प्राॅडक्टस की विशेषताओं को खूबियों के साथ वक्त की जरूरत और मानव शरीर के लिए अत्यावश्यक बताकर इतना ज्यादा ज्ञानी बना दिया जाएगा कि आप खुद में ही एक डाॅक्टर की आत्मा का वास महसूस करने लगोगे। 
बीमारी कोई भी हो, हृदय से जुड़ी हो या मांस पेशियों से अथवा आपके बालों,चेहरे और त्वचा के लिए भी आयुर्वेद का ठप्पा लगाकर फूड सप्लीमेंट की यह मार्केटिंग आपसे करवाई जाने लगेगी।
शानदार कमीशन और आकर्षक ब्रोशर व पैकिंग इन कंपनियों की खासियत होती है जो कि आपका कमीशन डिस्ट्रीब्यूटर के बाद भी कम से कम 10% का तो रखती ही हैं। 

कोई आम दवा अथवा खाद्य पदार्थ जो कि शरीर की जरूरत के लिए आवश्यक यदि आपको 100/- में प्राप्त होता रहा हो वो इन कंपनियों के द्वारा कम से कम 160/- रुपये का होता है जिसमें 20/- कंपनी की कमाई, 20/- खर्चा और पैकिंग व बाकी के 20/- में आप और डिस्ट्रिब्यूटर को निपटाया जाता है। 
ब्रोशर्स में कंपनी के उत्पाद की इतनी बढ़िया तरीके से उपलब्धियां छपी होती हैं कि न सिर्फ आप भ्रमित होते हैं बल्कि खुद खरीदने के साथ अपने करीबियों और पहचान वालों को भी खरीदने को मजबूर करते हैं।
इसके बाद खेल शुरू होता है आपको ब्रांज डायरेक्टर, सिल्वर डायरेक्टर और गोल्ड डायरेक्टर बनाने के साथ स्टार ऑफ द कंपनी बनाने का। इसके लिए बाकायदा आपको सेल टारगेट दिए जाते हैं जिनको पूरा करने के लिए आप घर का पैसा भी लगाने को तैयार हो जाते हैं।
लुभावने ऑफर के मैसेज आपके मोबाइल पर खनकने लगते हैं और आपको टारगेट पूरा करने के लिए एमएलएम का अगला चरण यानि अपने नीचे कुछ नए सदस्यों को बनाने के लिए बोला जाता है।
इस पूरे खेल में जो लोग शुरुआत में कंपनी से जुड़े होते हैं उनका कितना फायदा हुआ और किसने टारगेट पूरा कर कार जीती या जैकपाॅट जीता आपको समय समय पर उपलब्धियों के बतौर विशेष कांफ्रेंसों में समझाया जाता है। वो बात अलग है कि कंपनी वो खर्चा भी आपकी जेब से ही काटती है।
खेल शानदार है और आधुनिकीकरण के दौर में जिस प्रकार खुद को फिट और स्लिम के साथ आकर्षक बनाने की जो होड़ चल रही है उसमें ग्राहक फौरन फंसता है पर कुछ समय के बाद यह उत्पाद या तो असर नहीं करते पाए जाते हैं अथवा कई मामलों में इनके दुष्परिणाम भी साइड इफेक्ट्स के रूप में परिलक्षित होते हैं।
शुद्ध खाइए और शाकाहार और आयुर्वेद को ढंग से समझकर उचित औषधीय पदार्थों को ही अपनी जीवनचर्या में शामिल कीजिए। शाॅर्ट कट हर तरह से घातक होता है। जान है तो जहान है लेकिन फिर भी ये सब चल रहा है क्योंकि हम सब समझते हैं पर खुद ही अपनाते नहीं हैं।

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